चंडीगढ़ इंटेलेक्चुअल फोरम द्वारा सीआईआई में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ विषय पर बौद्धिक सम्मेलन आयोजित
चंडीगढ़:- देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं, राजनीतिक स्थिरता और राष्ट्रीय संप्रभुता को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच चंडीगढ़ के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों, विधि विशेषज्ञों, चिकित्सकों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित पेशेवरों ने कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई), सेक्टर-30, चंडीगढ़ में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ विषयक बौद्धिक सम्मेलन में भाग लिया।
चंडीगढ़ इंटेलेक्चुअल फोरम के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बढ़ाना, भ्रामक सूचनाओं का मुकाबला करना तथा राष्ट्रीय स्थिरता के समक्ष उभरती चुनौतियों पर गंभीर विचार-विमर्श करना था।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रेरक वक्ता श्री जतिंदर पाल मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति उसके संविधान, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता तथा नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी में निहित है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विरोध प्रत्येक नागरिक के मौलिक संवैधानिक अधिकार हैं, लेकिन लोकतंत्र के नाम पर हिंसा, भय का वातावरण उत्पन्न करना अथवा सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि एक जीवंत लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राष्ट्रहित और संवैधानिक मूल्यों को सदैव सर्वोपरि रखना आवश्यक है। लोकतांत्रिक संस्थाओं को टकराव और अव्यवस्था के माध्यम से कमजोर करने के बजाय सकारात्मक संवाद, पारदर्शिता और जनजागरूकता के माध्यम से मजबूत किया जाना चाहिए।
युवा पीढ़ी की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए श्री मल्होत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने में देश के युवाओं की क्षमताओं, आकांक्षाओं और सक्रिय भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बुद्धिजीवियों, शिक्षण संस्थानों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से युवाओं में तार्किक चिंतन, नागरिक जिम्मेदारी तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता विकसित करने का आह्वान किया।
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए डॉ. मोनिका बी. सूद, लेखिका एवं प्रबंध निदेशक, नवजीवन ग्रुप ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल राजनीतिक घोषणाओं से संभव नहीं है। इसके लिए संवैधानिक जागरूकता, संस्थागत जवाबदेही, जिम्मेदार नागरिकता तथा बौद्धिक वर्ग की निरंतर सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
सम्मेलन के प्रारंभ में श्री अरुण गोयल, प्रबंध निदेशक, अंबिका फार्मा सॉल्यूशंस ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि श्री जतिंदर पाल मल्होत्रा, विशिष्ट वक्ताओं, फोरम के सदस्यों तथा उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और राष्ट्रीय विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों एवं विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना समय की आवश्यकता है।
श्री राकेश भल्ला, चेयरमैन, एसोचैम ने पारदर्शी चुनावी प्रक्रियाओं और जागरूक जनभागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं की तथ्यपरक जानकारी, संस्थागत जवाबदेही और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जनविश्वास बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।