पद्म श्री से सम्मानित उत्तराखंड के सुमरी गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे खेमराज सुंद्रियाल एक दिग्गज व्यक्तित्व

उत्तराखंड – खेमराज सुंद्रियाल विष्णु हथकरघा पीसीआईएस लिमिटेड के अध्यक्ष खेमराज सुंद्रियाल, पांच दशकों से अधिक के अनुभव के साथ भारत की हथकरघा और टेपेस्ट्री बुनाई विरासत में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। उन्होंने न केवल बुनाई की जटिल कला में महारत हासिल की, बल्कि अपने करूणामय मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व के माध्यम से कारीगरों की पीढ़ियों को भी कुशल बनाया। उन्हें दुनिया भर में पारंपरिक बुनाई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है।

  1. 05 फरवरी, 1943 को उत्तराखंड के सुमरी गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे सुंद्रियाल ने सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, श्रीनगर, उत्तराखंड से हथकरघा प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा हासिल किया। खेतों की जुताई से लेकर भारत में वस्त्र परिदृश्य को बदलने तक की उनकी यात्रा अद्वितीय दृढ़ता, अनुशासन और उत्कृष्टता के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
  2. सुंद्रियाल ने वर्ष 1967 में बुनकर सेवा केंद्र दिल्ली में एक बुनकर के रूप में कार्य करना शुरू किया और हथकरघा के क्षेत्र में कदम रखा। सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने वर्ष 2001 में द विष्णु हैंडलूम पीसीआईएस लिमिटेड, एक सहकारी हथकरघा सोसायटी की स्थापना की और वहाँ अध्यक्ष के रूप में कार्य करके कई स्थानीय बुनकरों को प्रशिक्षित कर कुशल बुनकर बनाया। नवाचार के अतिरिक्त, उन्होंने प्रेरणादायक शिक्षक और सांस्कृतिक पथप्रदर्शक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देश भर के प्रसिद्ध संस्थानों में दस हजार से अधिक बुनकरों और छात्रों को प्रशिक्षित किया।
  3. सुंद्रियाल ने पुंजा को बदलकर पुंजा दुरी लूम में हट्टा तकनीक को व्यक्त कर कार्यान्वित किया और बुनकरों की दक्षता में सुधार किया, साथ ही वर्ष 1980 में उन्होंने पेट्रोफिल परियोजना के तहत हथकरघा में पॉलिएस्टर यार्न की शुरुआत की। उन्होंने वर्ष 1986 में एक परियोजना शुरू की जिसमें उन्होंने जैक्वार्ड लूम के माध्यम से जानवरों के आकार बनाए। वर्ष 2001 में, उन्होंने ऊनी धागे में जामदानी बुनाई को बढ़ावा दिया जिसके लिए उन्हें योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ और उन्होंने ललित कला अकादमी, आईआईसीडी जयपुर में अतिथि व्याख्याता के रूप में कार्य किया।
  4. सुंद्रियाल को अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें वर्ष 2009 में भारत सरकार द्वारा संत कबीर पुरस्कार, वर्ष 2001 में भारत सरकार द्वारा योग्यता प्रमाण पत्र, वर्ष 2018 में हरियाणा सरकार द्वारा योग्यता प्रमाण पत्र, वर्ष 1999 में दिल्ली राज्य हस्तशिल्प पुरस्कार, वर्ष 2011 में हथकरघा बुनाई के लिए ठाकुर वेद राम राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें वर्ष 2016 में हरियाणा के जिला प्रशासन पानीपत द्वारा पानीपत में हथकरघा के महत्वपूर्ण प्रचारक के रूप में चुना गया।

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