‘जल चेतना’ कार्यशाला ने जल संकट पर डाला प्रकाश, संरक्षण के लिए किया प्रेरित

पटियाला: स्कूल ऑफ एमिनेंस, फील खाना में “जल चेतना” कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आई जे डोडा फाउंडेशन द्वारा, जिसकी अगुवाई जोनिता डोडा कर रही हैं, आयोजित किया गया। इस पहल को पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी और पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय के सहयोग से पर्यावरण क्षतिपूर्ति फंड के तहत आयोजित किया गया। कार्यशाला में जल संरक्षण, प्रदूषण और भूजल के तेजी से घटते स्तर जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि पंजाब में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और राज्य के 75 प्रतिशत से अधिक ब्लॉक ‘ओवर-एक्सप्लॉइटेड’ श्रेणी में आ चुके हैं। साथ ही, नीति आयोग द्वारा पहले दी गई चेतावनियों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें देश के कई शहरों में गंभीर जल संकट की आशंका जताई गई थी।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों और ईको-क्लब के सदस्यों ने विशेषज्ञों के साथ इंटरएक्टिव सत्रों में बढ़-चढ़कर भाग लिया और जल संरक्षण के टिकाऊ उपायों तथा पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की। इस अवसर पर जोनिता डोडा ने अपने संबोधन में एल नीनो के बढ़ते प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु पैटर्न भारत में जल संकट को और गंभीर बना सकते हैं। उन्होंने भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों का हवाला देते हुए बताया कि एल नीनो की स्थिति कमजोर मानसून और कम वर्षा से जुड़ी होती है।

उन्होंने कहा, “जल संरक्षण अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। ‘जल चेतना’ के माध्यम से हम युवाओं को प्रेरित करना चाहते हैं कि वे जिम्मेदार आदतें अपनाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनमोल संसाधन की रक्षा करें।” इस आयोजन के समन्वय में जिला शिक्षा कार्यालय, पटियाला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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