सीएसआइआर- सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (इमटैक) के वैज्ञानिक-जी, डॉ. प्रदीप सेन को रॉयल सोसाइटी ऑफ़ केमिस्ट्री (आरएससी) ने प्रतिष्ठित 2026 होराइज़न प्राइज़ से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम को दो प्रमुख उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों – लीशमैनियासिस और चगास रोग – से निपटने के लिए उनके संयुक्त प्रयासों के लिए दिया गया है। ये बीमारियाँ दुनिया भर में 2 करोड़ से ज़्यादा लोगों को प्रभावित करती हैं, खासकर कम एवं मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) में, और फिलहाल इनसे बचाव के लिए कोई असरदार टीका उपलब्ध नहीं है।
डॉ. प्रदीप सेन, यूके की डरहम यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में 51 वैज्ञानिकों के एक वैश्विक समुह का हिस्सा थे। इस समुह ने मिलकर ऐसी नई दवाइयों के लक्ष्य की पहचान और पुष्टि करने का काम किया, जिनसे लीशमैनियासिस और चगास बीमारी के बेहतर इलाज का रास्ता खुल सकता है। टीम की प्रयासों से ऐसे अहम टूल और जानकारी मिली है, जिनसे इन खतरनाक बीमारियों के इलाज के लिए नई थेरेपी खोजने का काम तेज़ हो रहा है। डॉ. सेन और उनकी टीम ने विसरल लीशमैनियासिस (जिसे काला-अज़ार भी कहते हैं और जो लीशमैनियासिस का सबसे गंभीर और जानलेवा रूप है) पर अहम काम किया है।

सीएसआईआर-इमटैक में डॉ. प्रदीप सेन का शोध परजीवी ‘लीशमैनिया डोनोवानी’ (जिससे विसरल लीशमैनियासिस होता है) के मेजबान कोशिका संक्रमण प्रक्रिया पर आधारित है। साथ ही, वे विसरल लीशमैनियासिस में बीमारी बढ़ने के आणविक आधार की पहचान करने और नई दवा के लक्ष्य व दवा के अणु की खोज करने पर भी काम करते हैं।
सीएसआईआर-इमटैक की निदेशक डॉ. अलका राव ने डॉ. प्रदीप सेन को बधाई देते हुए कहा, “इमटैक चिकित्सा क्षेत्र की ऐसी ज़रूरतों के लिए समाधान खोजने में सबसे आगे रहा है, जिन पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है। दुनिया भर में 1.5 अरब से ज़्यादा लोगों को कम से कम एक ऐसी उष्णकटिबंधीय बीमारी (ट्रॉपिकल बीमारी) के इलाज की ज़रूरत है, जिस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया जाता; इसके बावजूद नई दवाएँ बनाने में निवेश बहुत कम है। डॉ. सेन को मिला यह पुरस्कार इन बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की हमारी अनुसंधान के प्रयासों को भी मान्यता देता है।”
सीएसआईआर-इमटैक सूक्ष्मजीव विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक राष्ट्रीय केंद्र है और इसकी स्थापना 1984 में हुई थी। इमटैक का विज़न और मिशन एक ऐसा अनुवादकीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जो बुनियादी खोजों से मज़बूत हो और अत्याधुनिक प्रक्रियाओं व प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए स्वास्थ्य सेवा तथा औद्योगिक क्षेत्र की उन ज़रूरतों को पूरा करना है जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं।


