चंडीगढ़ की दशकों पुरानी मांगों पर कांग्रेस अपने कार्यकाल का हिसाब दे : डॉ. धरिंदर तायल
चंडीगढ़:- भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ के मुख्य प्रवक्ता डॉ. धरिंदर तायल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चंडीगढ़ की चार प्रमुख लंबित मांगों में से तीन को बहुत जल्द पूरा किए जाने के आश्वासन का हार्दिक स्वागत किया है। इनमें से कुछ मांगें पिछले 30 से 40 वर्षों से लंबित हैं।
डॉ. तायल ने चंडीगढ़ के नागरिकों से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इस आश्वासन के साथ-साथ लगभग 258 करोड़ रुपये की नौ विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास से चंडीगढ़ के नागरिकों में खुशी और राहत की लहर दौड़ गई है।
संभावित घोषणाओं को लेकर चल रही चर्चाओं का उल्लेख करते हुए डॉ. तायल ने कहा कि पुनर्वास कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक, लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने तथा औद्योगिक क्षेत्रों के विकास संबंधी नियमों जैसे मुद्दे लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं।
“अंतिम घोषणाओं और उनके विस्तृत प्रावधानों का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया जाना चाहिए। संभावित फैसलों पर चर्चा करना पूरी तरह उचित है, लेकिन आलोचना इस आधार पर होनी चाहिए कि वास्तव में क्या निर्णय लिया गया है और उससे नागरिकों को कितना लाभ मिलेगा,” उन्होंने कहा।
कांग्रेस द्वारा इन मांगों को वर्षों से उठाए जाने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. तायल ने कहा कि केवल समस्याओं को उठाना किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि की मुख्य जिम्मेदारी नहीं है।
“मांग उठाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका समाधान करवाना ही वास्तव में जनता के लिए मायने रखता है। चंडीगढ़ के नागरिकों को कांग्रेस से यह पूछने का पूरा अधिकार है कि उसके निर्वाचित प्रतिनिधियों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए लगातार क्या प्रयास किए और ये मुद्दे दशकों तक लंबित क्यों रहे?” उन्होंने कहा।
डॉ. तायल ने कांग्रेस नेताओं से पूछा कि जब केंद्र में उनकी सरकार थी और चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ कांग्रेस नेता कर रहे थे, तब इन समस्याओं के समाधान की दिशा में कितनी प्रगति हुई और ये मांगें पूरी क्यों नहीं हो सकीं?
उन्होंने चंडीगढ़ के वर्तमान सांसद मनीष तिवारी से भी यह स्पष्ट करने को कहा कि उन्होंने इन लंबित मांगों को पूरा करवाने के लिए संबंधित अधिकारियों और मंत्रालयों के समक्ष क्या ठोस प्रयास किए हैं।
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष हरमोहिंदर सिंह लक्की द्वारा भ्रष्टाचार के लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. तायल ने कहा कि यदि कांग्रेस के पास भ्रष्टाचार के किसी मामले के ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए और संबंधित जांच एजेंसियों अथवा सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
“चंडीगढ़ की जनता को यह जानने का अधिकार है कि कथित भ्रष्टाचार किस प्रकार का है, इसमें कौन व्यक्ति या संस्थाएं शामिल हैं और कांग्रेस उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई चाहती है। जवाबदेही तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि केवल अस्पष्ट आरोपों के आधार पर,” उन्होंने कहा।
डॉ. तायल ने सवाल उठाया कि जब चंडीगढ़ का सर्वोच्च निर्वाचित राजनीतिक पद कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी के पास है, तो क्या लक्की उन पर भी आरोप लगा रहे हैं?
“क्या मनीष तिवारी इस कथित भ्रष्टाचार में भागीदार हैं? या उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है? अथवा वे असहाय हैं या केवल मूकदर्शक बने हुए हैं? लक्की को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए,” डॉ. तायल ने कहा।
डॉ. तायल ने आगे कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इन मतभेदों के कारण शहर के हित में उठाए जा रहे कदमों का स्वागत करने और चंडीगढ़ के नागरिकों की खुशी में सहभागी बनने से किसी को पीछे नहीं हटना चाहिए।
“चंडीगढ़ के नागरिकों का हित सर्वोपरि होना चाहिए। कांग्रेस को अपनी ओछी राजनीति से ऊपर उठकर चंडीगढ़ की जनता के साथ खड़ा होना चाहिए और उसकी खुशी में शामिल होना चाहिए।”
अंत में डॉ. तायल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ की वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान तथा शहर के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी।