कलाग्राम में सांग उत्सव में प्रदीप पाल सांगी और बाबू दान सिंह ने बांधा समां

कलाग्राम – पंचकूला के समीप स्थित कलाग्राम में चार दिवसीय सांग उत्सव का शुभारंभ सांस्कृतिक रंगों और उत्साह के साथ हुआ। हरियाणा की समृद्ध लोक परंपराओं को समर्पित इस आयोजन में बारिश के बावज़ूद क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय बना हुआ है।

20 मार्च 2026 को रोहतक के प्रसिद्ध कलाकार प्रदीप पाल सांगी ने अपनी टीम के साथ मंच संभाला और भारत पाक विभाजन पर आधारित लीलो चमन के किस्से सुनाए; उनकी पारंपरिक सांग और रागिनी शैली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और प्रस्तुति के दौरान खूब तालियां बटोरीं, इसके साथ ही अलवर से आए बाबू दान सिंह एवं उनकी टीम ने भी शानदार प्रस्तुति देकर हरियाणवी लोक संस्कृति की जीवंत झलक पेश की।

इस उत्सव का आयोजन नार्थ जोन कल्चरल सेंटर द्वारा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। कार्यक्रम में सांग विधा के माध्यम से लोककथाओं, सामाजिक संदेशों और पारंपरिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है।

सांग हरियाणा की एक प्राचीन लोकनाट्य शैली है, जिसमें संगीत, संवाद, अभिनय और नृत्य का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यह विधा न केवल मनोरंजन का माध्यम रही है, बल्कि सामाजिक जागरूकता फैलाने में भी अहम भूमिका निभाती आई है। कलाग्राम में चल रहा यह उत्सव इसी विरासत को संजोने और आगे बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास है।

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