
चंडीगढ़ :- 26 वर्षीय आकृति डोभाल ने देश की सबसे प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा में 93वीं रैंक हासिल कर शहर का मान बढ़ाया है। मूल रूप से आकृति डोभाल उत्तराखंड से है लेकिन उनका जन्म ओर पालन पोषण चंडीगढ़ में हुआ है । लगभग 10 लाख अभ्यर्थियों की भारी भीड़ के बीच यह मुकाम हासिल करने वाली आकृति की शैक्षणिक यात्रा हमेशा से ही मिसाल रही है। वे सेक्रेड हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-26 की टॉपर रही हैं और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज सेक्टर-12 से बीटेक प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में भी उन्होंने टॉप किया है। अखिल भारतीय उत्तराखंड विकास परिषद रजिस्टर्ड चंडीगढ़ के सचिव व कुमाऊं सभा के मीडिया प्रभारी शशि प्रकाश पांडे ने आकृति डोभाल को उनके निवास स्थान पर जा कर सम्मानित कर शुभकामनाएं दी ।
इंटरव्यू के दौरान आकृति ने उन मिथकों को तोड़ा जो कहते हैं कि यूपीएससी के लिए दिन-रात एक करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि 17-18 घंटे पढ़ना इंसानी तौर पर मुमकिन नहीं है। उन्होंने रोजाना 8 से 9 घंटे की पढ़ाई पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कभी दिन बहुत अच्छा होता था और कभी कम पढ़ाई हो पाती थी, लेकिन हर दिन थोड़ी-थोड़ी मेहनत करना यानी कंसिस्टेंसी सबसे जरूरी है। आकृति ने अपनी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया को पूरी तरह से छोड़ दिया था। उनका मानना है कि डिजिटल दुनिया आपको एडिक्शन की तरफ ले जाती है। खुद को तनावमुक्त रखने के लिए वे संगीत सुनती थीं और किताबें पढ़ती थीं। उन्होंने एक नया शौक किचन गार्डनिंग भी विकसित किया, जहाँ वे रोज सुबह एक घंटा अपनी छत पर बने गार्डन में बिताती थीं।
आकृति ने अपनी चुनौतियों को साझा करते हुए बताया कि उनके शुरुआती दो प्रीलिम्स क्लियर नहीं हुए थे। उस वक्त उन्हें लगा था कि शायद उनसे नहीं हो पायेगा ,लेकिन उनके परिवार ने उन्हें टूटने नहीं दिया। उनकी माता उनके लिए इमोशनल सपोर्ट बनीं, जबकि पिता ने उन्हें हमेशा निडर और साहसी बनना सिखाया। घर की सारी जिम्मेदारियां उनकी बहन ने अपने ऊपर ले लीं ताकि आकृति बिना किसी चिंता के पढ़ाई कर सकें।
आकृति को समाज सेवा की प्रेरणा अपनी नानी से मिली, जिनके साथ उन्होंने बचपन में लंगर सेवा जैसे कार्यों में समय बिताया था। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय चंडीगढ़ के ‘स्लीपी क्लासेस’ और ‘स्पेक्ट्रम’ जैसे संस्थानों के साथ-साथ दिल्ली के अपने शिक्षकों को भी दिया, जिन्होंने साइकोलॉजी और एथिक्स जैसे विषयों में उनकी मदद की। नए उम्मीदवारों को सलाह देते हुए आकृति ने कहा कि स्कूली स्तर पर पढ़ाई का बोझ लेने के बजाय अपने चरित्र और ईमानदारी पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान तो मिल जाता है, लेकिन एक अच्छा इंसान और अधिकारी बनने के लिए व्यक्तित्व का विकास सबसे जरूरी है।

