युवा संगम के तहत गुजरात के विद्यार्थियों ने जाना चंडीगढ़ का इतिहास और पंजाब की सांस्कृतिक विरासत
चंडीगढ़:- गुजरात से आए 47 विद्यार्थियों ने युवा संगम कार्यक्रम के तहत चंडीगढ़ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण कर पंजाब की समृद्ध विरासत, इतिहास और परंपराओं को करीब से जाना। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर), मोहाली की मेजबानी में आए विद्यार्थियों के पंजाब प्रवास के पहले दिन उन्हें शहर की वास्तुकला, कला, शैक्षणिक विरासत और पारंपरिक पंजाबी खानपान से रूबरू होने का अवसर मिला।
शिक्षा मंत्रालय की पहल और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत आयोजित युवा संगम का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और विरासत को समझने का अवसर प्रदान करना है, ताकि आपसी संवाद और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिल सके।
नोडल अधिकारियों डॉ. विशाल भारद्वाज और डॉ. तनुश्री खंडाई के साथ विद्यार्थियों ने दिन की शुरुआत सुखना लेक से की। शिवालिक पहाड़ियों से आने वाले मौसमी जल प्रवाह को रोककर वर्ष 1958 में विकसित की गई इस झील ने विद्यार्थियों को चंडीगढ़ की नियोजित शहरी संरचना से परिचित कराया। इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध रॉक गार्डन का भ्रमण किया, जहां दिवंगत नेक चंद ने बेकार सामग्री से आकर्षक कलाकृतियां और मूर्तियां तैयार कर कला की अनूठी मिसाल पेश की है।
विद्यार्थियों ने पंजाब विश्वविद्यालय स्थित गांधी भवन का भी दौरा किया और गांधियन एंड पीस स्टडीज़ विभाग के चेयरपर्सन प्रो. मनीष शर्मा से संवाद किया। इस दौरान उन्हें विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक यात्रा के बारे में बताया गया, जिसकी स्थापना 1882 में लाहौर में हुई थी और विभाजन के बाद इसे भारत में पुनर्स्थापित किया गया। विभाग के इतिहास से जुड़े पहलुओं के साथ गांधी भवन की विरासत पर भी चर्चा हुई। इतिहास विभाग के प्रो. जसबीर सिंह ने विद्यार्थियों को पंजाब के इतिहास और उसकी सांस्कृतिक पहचान से अवगत कराया।
इसके बाद होटल शिवालिकव्यू में विद्यार्थियों ने पारंपरिक पंजाबी व्यंजनों का स्वाद लिया। यात्रा के अगले पड़ाव में वे पटियाला पहुंचे, जहां उन्होंने फुलकारी कला और शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव किया।
आईआईएसईआर मोहाली के निदेशक प्रो. अनिल के. त्रिपाठी ने कहा की चंडीगढ़ और पंजाब विश्वविद्यालय नियोजित शहरी विकास, कलात्मक रचनात्मकता और समृद्ध शैक्षणिक विरासत का अनूठा संगम हैं। ऐसे अनुभव विद्यार्थियों को पंजाब के इतिहास और संस्कृति को करीब से समझने का अवसर देते हैं और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सार्थक बनाते हैं।