कृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे चंडीगढ़ के श्रद्धालु, श्रीराम व समुद्र मंथन के प्रसंग से मिला जीवन दर्शन
चंडीगढ़:- “जन्मे हैं कृष्ण कन्हैया, गोकुल में बाजे बधाइया…” के दिव्य जयकारों, ढोल-नगाड़ों की थाप और माखन-मिश्री की मिठास के बीच सेक्टर 45 स्थित सब्जी मंडी ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम और भावुक कर देने वाले माहौल में मनाया गया। श्री राधा बल्लभ भागवत सेवा ट्रस्ट, राधा बल्लभ महिला मंडल एवं आर बी युवा शक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस कथा गंगा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
कथा व्यास श्रद्धेय श्री विजय शास्त्री ने प्रह्लाद चरित्र, समुद्र मंथन, श्रीराम चरित्र और श्री कृष्ण जन्म प्रसंग का सांसारिक व व्यावहारिक दृष्टिकोण से अत्यंत मर्मस्पर्शी वर्णन किया:
कथा व्यास ने प्रह्लाद की अटूट भक्ति और निष्ठा का वर्णन करते हुए सांसारिक संबंधों में ईश्वर पर पूर्ण विश्वास का महत्व समझाया। जब शास्त्री ने करुण भाव में भजन ‘बाबा कर दो विदा आज तो प्यार से’ गाया, तो पांडाल में उपस्थित माताओं और श्रद्धालुओं की आंखें छलक आईं। शास्त्री जी ने बताया कि सांसारिक कठिनाइयों में जब मनुष्य का सहारा छूट जाता है, तब केवल ईश्वर का आश्रय ही जीवन की नैया पार लगाता है।
समुद्र मंथन प्रसंग की व्याख्या करते हुए पूज्य शास्त्री ने बताया कि यह मंथन केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन का मंथन है। जब व्यक्ति अपने विचारों का मंथन करता है, तो सबसे पहले ‘विष’ (काम, क्रोध, लोभ) बाहर आता है, जिसे सहने का धैर्य होना चाहिए। उसके बाद ही भक्ति रूपी ‘अमृत’ और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुए व्यास ने कहा कि रामकथा हमें पुत्र, भाई, पति और राजा के रूप में कर्तव्यों का पालन करना सिखाती है। त्याग और मर्यादा ही एक सुखी परिवार और समाज का आधार है। इसी दौरान शास्त्री के भजन ‘ओ पापी मन करले भजन’ और ‘लागे वृन्दावन निको’ पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर तालियां बजाते रहे।
जैसे ही कथा में भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य का समय आया, पूरा पंडाल ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। बाल गोपाल के जन्म की झांकी देख श्रद्धालु खुशी से झूम उठे और भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे। खिलौने, मिठाइयां और टॉफियां लुटाकर जन्मोत्सव का जश्न मनाया गया।