नशा को समाप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग, स्वयंसेवी संस्थाओं और धार्मिक नेताओं को आगे आना होगा : राज्यपाल
चंडीगढ़ :- डॉ. एम.एस. मलिक, आईपीएस (सेवानिवृत्त), अध्यक्ष एवं कार्यकारी समिति, सेमिनार जाट सभा, चण्डीगढ़ एवं पंचकूला के सौजन्य से “नशामुक्त भविष्य का निर्माण” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन जाट भवन, 2-बी, सेक्टर 27-ए, मध्य मार्ग, चंडीगढ़ मे किया गया
इस अवसर मुख्य अतिथि पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने इस विशाल कार्यक्रम को करने के लिए जाट सभा और अध्यक्ष डॉ. एम.एस. मलिक, आईपीएस (सेवानिवृत्त), का धन्यवाद किया की इन्होंने नशामुक्त भविष्य का निर्माण” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया और अपने संदेश मे कहा की नशा मुक्त नशे की समस्या का समाधान केवल पुलिस या कानून से संभव नहीं हैl इसे खत्म करने के लिए समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को एकजुट होकर इसे एक ‘जन आंदोलन’ बनाना होगाl इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए समाज के हर वर्ग, स्वयंसेवी संस्थाओं और धार्मिक नेताओं को आगे आना होगा| नशे की चपेट में आ चुके लोगों को केवल सजा देना समाधान नहीं हैl उन्हें सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में वापस लाना, उनका इलाज करना और रोजगार उपलब्ध कराना भी इस लड़ाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैlराज्यपाल महोदय ने राज्य के सभी नागरिकों और शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि वे “युद्ध नशे के विरुद्ध” अभियान का हिस्सा बनें और पंजाब को एक स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध राज्य बनाने में अपना सहयोग देंl
इस अवसर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री सत्य पाल जैन माननीय पूर्व सांसद और भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने इस कार्यक्रम पर जाट सभा का धन्यवाद किया और नशा मुक्त पर अपना संदेश दिया और इस कहा की राज्यपाल कटारिया ने ‘नशा मुक्त-रंगला पंजाब’ अभियान के तहत सीमावर्ती जिलों (जैसे तरनतारन, फाजिल्का और फिरोजपुर) में खुद पैदल यात्राएं कर आम जन से सीधा संवाद किया हैl उनका उद्देश्य गांव-गांव तक जागरूकता फैलाना हैlयुवाओं को उनका स्पष्ट संदेश है इस चुनौती से निपटने के लिए हमें अपनी युवा पीढ़ी को बचाना होगा, क्योंकि युवा ही देश का भविष्य है
इसके साथ ही संगोष्ठी के अध्यक्ष: डॉ. एम.एस. मलिक, आईपीएस (सेवानिवृत्त), हरियाणा के पूर्व डीजीपी, जाट सभा चंडीगढ़/पंचकुला ने सभी गांमान्यो का परिचय दिया और सभी का स्वागत किया और कहा नशा एक धीमा जहर है, जो न केवल व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बर्बाद करता है, बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज को भी खोखला कर देता है। आइए, एक मजबूत संकल्प लें और समाज को नशा-मुक्त बनाने में संदेश दिया
इनके साथ ही गोष्टी मे – न्यायमूर्ति मदन लोकुर, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि नशा करने वालों को केवल एक अपराधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें एक पीड़ित के रूप में मानते हुए पुनर्वास पर जोर दिया जाना चाहिए और मादक पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए समाज, सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मिलकर काम करना चाहिए, और न्याय प्रणाली को पीड़ित-अनुकूल होना चाहिए।
इसके साथ उपस्थित सभी वक्ताओ ने अपने विचार रखे – जी.एस. मल्ही आईपीएस (सेवानिवृत्त), हरियाणा के पूर्व डीजीपी, संगोष्ठी के उपाध्यक्,
अन्य गणमान्य व्यक्ति डॉ. के.पी. सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त), पूर्व डीजीपी, हरियाणा, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सुखदीप सिंह सांगवान, डॉ. एच.के. बाली, निदेशक कार्डियोलॉजी, लान्स्टा अस्पताल मोहाली, डॉ. अनुरप्रीत दुग्गल, संयुक्त सचिव, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, सुश्री सरिता मलिक, वरिष्ठ औषधि नियंत्रक, श्री डी.पी. सिंह, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, श्री के.सी. रेड्डी, आईपीएस (सेवानिवृत्त), असम के पूर्व डीजीपी, श्री करनैल सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त), पूर्व निदेशक, ई.डी. प्रो. विनोद कुमार चौधरी, अध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, पी.यू., चंडीगढ़, रेणु विग पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति सहित सभी ने नशीली दवाओं का बहिष्कार करने पर अपने वक्तव्य दिये कार्यकर्म उपरांत सभी गांमान्यो को मोमंतों देकर समानित किया इस अवसर पर श्री जी.एस. मल्ही, आईपीएस (सेवानिवृत्त) – सेमिनार के उपाध्यक्ष, राम कुमार मलिक – वरिष्ठ उपाध्यक्ष, सतबीर सिंह सैनी – एचसीएस (सेवानिवृत्त) आयोजन सचिव, जय पाल पुनिया – उपाध्यक्ष, बी.एस. गिल – महासचिव सहित सभा के समस्त सदस्यों की उपस्थिति रही कार्यक्रम उपरांत सभी को भोजन दिया गया


