श्रीनगर/उत्तराखण्ड (यूकेन्यूज24/सुरेंद्र नेगी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5वें और वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार व ‘भारत का जेम्स बाॅन्ड’ के नाम से पूरे देश में विख्यात अजीत डोभाल भारत के सबसे जाबांज जासूस रहे। अजीत डोभाल 2004 से 2005 तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के निदेशक के रूप में कार्य तथा आईपीएस कैडर के सेवानिवृत्त अधिकारी व इंटेलिजेंस का एक मांझा हुआ खिलाड़ी माना जाता है। जिनका जीवन किसी लगभग किसी एडवेंचर फिल्म की कहानी जैसा ही है। डोभाल 7 साल तक पाकिस्तान में जासूस रहे। उन्होंने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया है। आज भी उनका नाम सुनकर दुश्मन कांप जाते हैं। डोभाल का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में 20 जनवरी 1945 को हुआ था। उनके पिता भी भारतीय सेना में अधिकारी थे। इसी वजह से अजीत डोभाल की पढ़ाई लिखाई आर्मी स्कूल में हुई। उन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद 1968 में केरल कैडर आईपीएस बन गए। पुलिस अधिकारी के रूप में चार साल सेवा देने के बाद 1972 में उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ज्वाॅइन कर लिया। अपनी जासूसी के काम से आईबी में उन्होंने कई सीक्रेट आपरेशन को अंजाम दिया। 2005 में वो आईबी डायरेक्टर के पद से रिटायर हुए। एनएसए के रूप में आज भी वो देश की सुरक्षा के लिए ढाल बने खड़े रहते हैं।
कीर्ति चक्र से सम्मानित – राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को देश के कई बड़े सम्मान से नवाजा जा चुके है। वे देश के इकलौते ऐसे नौकरशाह हैं, जिन्हें कीर्ति चक्र और शांतिकाल में मिलने वाले गैलेंट्री अवाॅर्ड मिला है। डोभाल को जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा का करीब 40 साल का अनुभव है। उन्हें 31 मई 2014 को भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया। उनके नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे बड़े मिशन को अंजाम दिया। कहा जाता है कि पिछले साल जब आतंकी संगठन पीएफआई पर रातों-रात बैन लगाया गया तो इसकी पूरी योजना भी डोभाल के नेतृत्व में की गई। पाकिस्तान में की जासूसी-अजीत डोभाल एनएसए बनने के बाद बहुत कम लोग ही उनके जीवन का सबसे बड़ा जासूसी का किस्सा जानते हैं जो पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है। डोभाल पहली बार 1972 में जासूस बनकर पाकिस्तान गए थे। उन्होंने वहां 7 साल गुजारे और कई खूफियां जानकारियां हासिल की। वे पाकिस्तान में मुस्लिम बनकर रहे और उर्दू भाषा में महारथ हासिल की। उन्हें पाकिस्तान के कई खुफिया राज पता है, इसलिए आज भी पाकिस्तान उनके नाम से घबराता है।
आपरेशन ब्लू स्टार में निभाई अपनी भूमिका – अजीत डोभाल ने अमृतसर स्वर्ण मंदिर से खालिस्तान समर्थक सिख उग्र वादियों के खात्मे के लिए दो आपरेशन किए गए। उस समय वो एक रिक्शा चालक बनकर वहां गए और बड़ी चतुरता से पूरे मिशन को अंजाम दिया। उन्होंने सुरक्षा बलों को आतंकियों की पूरी जानकारी दी, उस खबर के आधार पर ही सैनिकों को खालिस्तानियों को मंदिर से बाहर निकालने में काफी मदद मिली। इस मिशन को आपरेशन ब्लू स्टार कहा जाता है। इस पूरे आपरेशन में डोभाल नायक बने। साल 1990 में कंधार प्लेन हाईजैक के दौरान हुए आपरेशन ब्लैक थंडर में भी डोभाल मुख्य भूमिका में थे। वह उस टीम को लीड कर रहे थे, जो आतंकियों से निगोसिएशन कर रही थी। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में कई आतंकियों को भी उन्होंने सरेंडर कराया। 2015 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक आपरेशन के हेड प्लानर भी डोभाल ही थे। वो न केवल प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में देश की सुरक्षा में तैनात हैं, बल्कि इंदिरा गांधी की सरकार में हुए आपरेशन ब्लू स्टार में भी उनकी प्रमुख भूमिका थी।


