पौड़ी गढ़वाल – उत्तराखंड के पौड़ी जिले के पौड़ी शहर से 56 किलोमीटर की दूरी पर शिव महादेव का निराकार रूप बिनसर महादेव मंदिर स्थित है। जिसमें आज तक कोई मूर्ति नहीं है। गांव के लोगों के अलावा आस पास क्षेत्र के लोगों की आस्था है कि भगवान शिव निराकार रूप में भी उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। हर साल वैकुंठ चतुर्दशी को मनाये जाने वाले मेले में स्थानीय लोगों अलावा दूर-दूर से लोग बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इस मेले में दिशा धणीयों को आमंत्रित किया जाता है और वे भी अपनी मन्नत मांगते हैं जो पूरी भी होती है। मंदिर परिसर में निरंकार रूप के अलावा यहां भक्तगण अपनी मनोकामना पूरी होने पर नंदी के रूप वैल को मंदिर में स्थापित करते हैं। कई शादियों का बना मंदिर में निराकार रूप के अलावा पानी की मंडल धारा, हवन कुंड ओर चारों तरफ बाज़ के पेड़ हैं जो मंदिर में शीतल वातावरण रखते हैं। मंदिर की कहानी के बारे में मेहरबान सिंह नेगी ने बताया कि यह देवता कुमाऊं गढ़वाल से आया हुआ है। जो कई सदियों पहले यहां पर आ चुका है और तब से यहां पर बसा हुआ है इस मंदिर के पुजारी पट्टी चौथन पौड़ी गढ़वाल से आते हैं जो कि यहां से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। जब भी यहां पर साल भर पूजा की जाती है तो देवता को पूजने के लिए मंदिर की पुजारी को उनके गांव से लेकर आना पड़ता है। पहले यह मंदिर इतना प्रचलित नहीं था, धीरे-धीरे इस मंदिर का आसपास के लिए अलावा दूर-दूर तक प्रचलित होने लग गया है, जिसका कारण है कि यहां से 7 किलोमीटर की दूरी पर विश्व का एकमात्र राहू मंदिर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं और इतिहासकारों के अनुसार शिव का यह महान नराकार रूप केवल उत्तराखंड की कुछ जिलों में स्थित है और इस देवता को लोग कुलदीप कुल देवता के रूप पूजा करते हैं

उत्तराखंड मरखोला गांव

